Hindi Bhasha

Varnmala In Hindi | हिन्दी भाषा एवं वर्णमाला

varnmala in hindi | hindi varnamala | हिंदी वर्णमाला भाषा क्या है ? भावों को अभिव्यक्त करने के माध्यम को भाषा कहते है। हिन्दी भाषा मूलतः आर्य परिवार की भाषा है। इसकी लिपि देवनागरी है जिसका विकास ब्राह्मी लिपि (इसी लिपि में वैदिक साहित्य रचित) से हुआ। हिन्दी के विकास में वैदिक संस्कृत, लौपिक संस्कृत …

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व्यंजन भेद-अर्थ एवं महत्व | Vyanjan Kitne Hote Hain

Vyanjan Kitne Hote Hain | Vyanjan Kitne Prakar Ke Hote Hain | Vyanjan In Hindi | Vyanjan Kise Kahate Hain स्वरों की सहायता से बोले जाने वाले वर्ण व्यंजन कहलाते है। जिन ध्वनियों का उच्चारण करते समय श्वास मुख के किसी स्थान विशेष (तालु मूर्धा, ओष्ठ या दाँत) आदि का स्पर्श करते हुए निकले उन्हें …

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अलंकार: अलंकार की परिभाषा, प्रकार तथा उदाहरण | Alankaar Ki Paribhasha

अलंकार (Alankaar) शब्दों में पाई जाने वाली अलंकार अनेक हैं उनमें से कुछ प्रमुख अलंकार इस प्रकार हैं अलंकार की परिभाषा (Alankaar Ki Paribhasha) जो यंत्र काव्य की सुंदरता बढ़ाते हैं, उन्हें  अलंकार कहा जाता हैं । जिस प्रकार से नारी अपनी सुंदरता बढ़ाने के लिए विभिन्न आभूषणों  को धारण करती हैं उसी तरह काव्यों की सुंदरता …

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रस | Ras in Hindi | रस के भेद एवं उदाहरण | परिभाषा | प्रकार

रस काव्य का मूल आधार ‘ प्राणतत्व ‘ अथवा ‘ आत्मा ‘ है रस का संबंध ‘ सृ ‘ धातु से माना गया है। जिसका अर्थ है जो बहता है , अर्थात जो भाव रूप में हृदय में बहता है उसे को रस कहते हैं। एक अन्य मान्यता के अनुसार रस शब्द ‘ रस् ‘ …

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Ras Ki Paribhasha | रस की परिभाषा | स्थायी भाव | रस के अंग

रस की परिभाषा (Ras Ki Paribhasha) – काव्य को पढने से जिस आनंद की अनुभूति होती है अर्थात जिस अनिवर्चनीय भाव का संचार ह्रदय में होता है, उसी आनंद को रस कहा जाता है | रस का विवेचन सर्वप्रथम भरत मुनि ने अपने ग्रन्थ नाट्य शास्त्र में किया था | भरत मुनि के अनुसार रसों …

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What is Samas in Hindi | समास की परिभाषा, भेद तथा उदाहरण

समास | Samas in Hindi समास का शाब्दिक अर्थ होता है – संक्षिप्त या दो से अधिक शब्दों से मिलकर बने शब्द को समास कहते हैं | समास में दो शब्दों का योग होता है जबकि संधि में दो वर्णों का योग होता है समाज के कुल भेद इस प्रकार है | प्रमुख समास पद …

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Chhand In Hindi | छन्द | हिन्दी व्याकरण

छन्द छन्द शब्द संस्कृत के छिति धातु से बना है।,छिदि का अर्थ है-आच्छादित करना ! सर्वप्रथम छन्द की चर्चा ऋग्वेद में आई है। छन्द शास्त्र का प्रथम प्रणेता आचार्य पिंगल को माना जाता है। इनकी रचना छन्द सूत्रम् है। अत: कहा जाता है कि छन्द वह सुन्दर आवरण है जो कविता-कामिनी की सुन्दरता में चार …

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Visheshan In Hindi | विशेषण

विशेषण संज्ञा और सर्वनाम की विशेषता प्रकट करने वाले शब्दों को विशेषण कहते है, विशेषण एक ऐसा शब्द है जो हर हाल में संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है। विशेषण और विशेष्य-जिस संज्ञा या सर्वनाम शब्द की विशेषता प्रकट की जाती है विशेष्य और जो विशेषता सूचक शब्द होता है उसे विशेषण कहते हैं। …

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Hindi Vyakaran| हिन्दी व्याकरण | काल

Hindi Vyakaran | हिन्दी व्याकरण | काल काल क्रिया का वह रूप जिससे क्रिया के होने का समय तथा उसकी पूर्णता एवं अपूर्णता का बोध होता है, काल कहते हैं। राधा गीत गाती है। राधा गीत गाती थी। राधा गीत गाएगी। इन वाक्यों में ‘है’ से वर्तमान का बोध होता है, ‘थी’ से बीते समय …

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संधियाँ | सन्धि को कैसे पहचानें ?

संधि:- (Sandhi) सन्धि शब्द का अर्थ होता है = मेल, जब हम किसी दो वस्तुओं को एक में मिलाते है तो उनमें कुछ न कुछ परिवर्तन होता ही है।  जैसे:- हमने एक कटोरी में चीनी ली और उसी में थोड़ा पानी मिलाया तो जैसे ही हमने उस चीनी में पानी डाला उसमे एक परिवर्तन हुआ …

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